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Monday, 16 April 2018

हकीक़त के छाले

image-credit~Google


मुझे लगते ख़्वाबों के ये अफ़साने है प्यारे बड़े
असल में तो दुखते है हकीक़त के छाले बड़े

किसे कहूँ यार अपना,नहीं कोई अब दिलदार अपना
दिल को मेरे खलते हैं अपनों के ये दिखावे बड़े

लम्हा है ख़ुशी का जी भर के मुस्कुराने दो इन्हें
मेरी आँखों ने सैलाब ग़मों के है बाअदब संभाले बड़े

ऊँचें मकानों में ही नहीं रहा करते अमीर सभी
मिट्टी के इन महलों में भी बसते है दिलवाले बड़े

रोशनी का ज़रिया इक ये आफ़्ताब ही तो नहीं
चराग़ उम्मीदों के भी करते हैं जहां में उजाले बड़े

शिवानी मौर्य
©vibespositiveonly

10 comments:

  1. अच्छी कोशिश है
    उम्दा ख्याल

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  2. वाह!!सुंंदर !

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  3. बहुत सुन्दर...

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  4. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 18अप्रैल 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आपकी बहुत आभारी हूँ..😊बहुत खुशी है की मेरी रचना को "पांच लिंकों का आनन्द में" शामिल किया गया..

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  5. सुन्दर रचना
    सादर

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  6. बहुत उम्दा अल्फ़ाज़! बधाई!!!

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  7. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ३० अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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    1. आपकी बहुत आभारी हूं मेरी रचना को 'लोकतंत्र'में स्थान देने को लिए..
      सधन्यवाद

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  8. निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' २१ मई २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक के लेखक परिचय श्रृंखला में आपका परिचय आदरणीय गोपेश मोहन जैसवाल जी से करवाने जा रहा है। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/



    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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