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Saturday, 16 December 2017

मैं उम्मीद हूँ



माना अँधेरा घना है पसरा हर ओर
पर आस का चमकीला सितारा
मैं इसमें ओझल होने कैसे दूँ
मैं उम्मीद हूँ,तुम्हें ना उम्मीद होने कैसे दूँ|

माना वीरान है दिल की ज़मीं
पर बीज तमन्ना का उगाये बगैर
मैं इसे बंजर होने कैसे दूँ
मैं उम्मीद हूँ,तुम्हें ना उम्मीद होने कैसे दूँ|

माना पाँव में है छाले बड़े
पर बीच डगर में रूककर
मैं इन्हें विश्राम करने कैसे दूँ
मैं उम्मीद हूँ,तुम्हें ना उम्मीद होने कैसे दूँ|

माना पंख होंसलों के है पस्त
पर क्षितिज तक उड़ान भरे बगैर
मैं इन्हें थकने कैसे दूँ
मैं उम्मीद हूँ,तुम्हें ना उम्मीद होने कैसे दूँ|

माना ख़वाब है बड़े महंगे इस शहर में
पर इन सपनीली आँखों को
मैं गरीब होने कैसे दूँ
मैं उम्मीद हूँ,तुम्हें ना उम्मीद होने कैसे दूँ|

माना साहस है टुकड़ो में छिटका पड़ा
पर किसी सस्ते कांच की भांति
मैं इसे बिखर जाने कैसे दूँ
मैं उम्मीद हूँ,तुम्हें ना उम्मीद होने कैसे दूँ|

गिरकर उठने का,खोकर पाने का
उजड़ कर बसने का ये सिलसिला टूटने कैसे दूँ
हाँथ मेरे दामन से तुम्हारा छूटने कैसे दूँ
मैं उम्मीद हूँ,तुम्हें ना उम्मीद होने कैसे दूँ||

Ⓒvibespositiveonly

Thursday, 14 December 2017

गुस्ताख़ नज़रें



ये नज़रें हैं गुस्ताख़
कहीं ये कोई हसीं भूल ऐ मेरे यार कर ना दें

तुम्हारी निगाहों से मिलकर
कहीं ये तुम्हें भी चाहत में बेक़रार कर ना दें

मेरे दिल का हाल है बुरा
कहीं ये बेपरवाही से इसका इज़हार कर ना दें

हम तो हो चुके है मोहब्बत में बर्बाद
कहीं ये तुम्हें भी जुनूने इश्क में बीमार कर ना दें

खुद तो जल रही है बनकर शमा
कहीं ये समझ तुम्हें परवाना राख़ मेरे यार कर ना दें|| 

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Wednesday, 13 December 2017

उस शाम पहली दफ़ा..💖



उस शाम पहली दफ़ा..💖

जब तुम मेरे बिलकुल करीब बैठे थे
हाँ , देखा था मैंने
कुछ ख़्वाब सलोने तुम अपनी निगाहों में बुन रहे थे

तुम एक-एक कर दिल के राज़ खोल रहे थे
हाँ, देखा था मैंने
शब्दों से नहीं तुम आँखों से बोल रहे थे

तुम मेरी चंचलता को यूँ बेफिक्री से ताक रहे थे
हाँ, देखा था मैंने
जब मुझ संग तुम भी जैसे बच्चे बन रहे थे

तुम दिल के शजर के पत्तों पर मेरा नाम लिख रहे थे
हाँ,देखा था मैंने
जब जुनूने-ऐ-इश्क़ में बदनाम तुम सरेआम हो रहे थे

तुम मेरी मृगनयनी आँखों में खुद का अक्स तलाश रहे थे
हाँ,देखा था मैंने
जब इनमे डूब कर भी तुम पार लग रहे थे

तुम मेरी धड़कनों का शोर बड़ी ख़ामोशी से सुन रहे थे
हाँ, देखा था मैंने
जब इस शोर में भी तुम  सुकून-ऐ-राहत महसूस कर रहे थे

तुम ठण्ड से ठिठुरती उस शाम में गुनगुनी धूप से लग रहे थे
हाँ, देखा था ना तुमने
जब साँझ के सूर्य की भांति तुम मुझमे ढल रहे थे ||
Ⓒvibespositiveonly



Tuesday, 10 October 2017

दोस्ती



दोस्त तो बहुत मिले है
पर तुम सा यार कोई नही

रिश्ते अंगिनत मिले है
पर तुम सा बंधन कोई नही

मतलब के लोग बहुत मिले है
पर तुम सा  निस्वार्थी कोई नही

साथ निभाने वाले बहुत मिले है
पर तुम सा साथी कोई नही

दिल वाले बहुत मिले है
पर तुम सा दिलदार कोई नही

सुख की छावं साझा करने वाले बहुत मिले है
पर तुम सा दुख बाँटने वाला कोई नही

मुखौटो पर मुखैटे बहुत मिले है
पर तुम सा साफ़ दिल कोई नही

भीड़ मे अपने बहुत मिले है
पर तुम सा अपना कोई नही

दोस्ती की कसमे खाने वाले बहुत मिले है
पर तुम सा इसके मायने समझने वाला कोई नही

दोस्ती की मिसाले बहुत मिली है
पर तुम जैसी इसकी परिभाषा कोई नही....
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Tuesday, 26 September 2017

प्रेम

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मैं नहीं जानती थी प्रेम के रंग कैसे होते है
तुमसे मिलकर जाना प्रेम में इंद्रधनुष ऐसे होते है 

प्रेम में अधरों से किये  इज़हार कैसे होते है 
तुमसे मिलकर जाना आँखों ही आँखों में इक़रार ऐसे होते है 

प्रेम में  दो जिस्म एक जान कैसे होते है 
तुमसे मिलकर जाना एक रूह के दो ठिकाने ऐसे होते है 

प्रेम में कसमें वादों के सिलसिले कैसे होते है 
तुमसे मिलकर जाना बिन शर्तो में बंधे बंधन ऐसे होते है 

प्रेम में करवटों से भरे इंतज़ार के फ़साने कैसे होते है 
तुमसे मिलकर जाना चांदनी के धागों से बुने ख़्वाब ऐसे होते है

प्रेम में शमा परवाने के अफ़साने कैसे होते है 
तुमसे मिलकर जाना खुद से बेगाने,दीवाने ऐसे होते है 

प्रेम में 'मैं' और 'तुम' जाने 'हम' कैसे होते है 
तुमसे मिलकर जाना 'हम' में 'तुम', 'तुम' में 'हम' ऐसे होते है||

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Tuesday, 19 September 2017

एक चाहत



एक चाहत उसकी भी थी
रिमोट वाली कार की
पर लड़की हो तुम,
गुड़िया से खेलो
उसके जैसा स्वाभाव ले लो
ख़ामोशी से तुम सब सह लो

एक चाहत  उसकी भी थी
अंग्रेजी स्कूल जाने की
पर लड़की हो तुम,
हिंदी माध्यम में पढ़ो
ब्याह आराम से हो जाए
इतनी बस तुम शिक्षा ले लो

एक चाहत  उसकी भी थी
बल्ला थाम बड़ा एक खेल खेल जाने की
पर लड़की हो तुम,
हाथ में बेलन पकड़ो
रसोई को कोई खेल मत समझ लो
गोल रोटी तुम बनाना सीख लो

एक चाहत  उसकी भी थी
कुल का नाम जग में रोशन करने की
पर लड़की हो तुम,
दीपक बनने का प्रयास मत करो
बेटी धर्म को निष्ठा से निभा लो
पराये घर में सबकी तुम साख़ बचा लो

एक चाहत उसकी भी थी
काँधे से कान्धा मिलाकर चलने की
पर लड़की हो तुम,
अपनी सीमा को मत लांघो
गृहस्थी के व्रत को धारण कर लो
घर को चलाने की तुम आदत डाल लो

एक चाहत उसकी भी थी
अपनी हर ख्वाहिश को पूरा करने की
पर लड़की है वो ,
हसरतें रखने की वो हक़दार नहीं
वो तो जनम लेती है
सबकी इच्छा से जीने के लिए..


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Saturday, 16 September 2017

इंतज़ार



वो आँखें
जो रात-रात जग कर
तुमको  सुलाया करती थी
हाँ, उन सूनी, धीमी आँखों
को भी इंतज़ार है..

वो आलिंगन
जो अक्सर खुद में समेट कर
तुमको महफूज़ रखा करता  था
हाँ, उस कमज़ोर आलिंगन
को भी इंतज़ार है..

वो उँगलियाँ
जो थम कर नन्हे हाँथ
तुमको चलाया करती थी
हाँ,उन बेबस उँगलियों
को भी इंतज़ार है..

वो काला टीका
जो हर दफ़ा रक्षक बन
तुमको बुरी नज़रों से बचाया करता था
हाँ,उस सफ़ेद पड़ गये टीके
को भी इंतज़ार है..

वो निवाले
जो बस एक और,अच्छा ये आख़री
बोल तुमको भूख से ज्यादा खिलाया करती थी
हाँ,उन भूखे निवालों
को भी इंतज़ार है..

वो आशीर्वाद
जो किस्मत को भी पीछे छोड़
तुमको सफलता की सीढ़ी चढ़ाया करता था
हाँ,उस भूले बिसरे आशीष
को भी इंतज़ार है..

वो कंधें
जो बड़े शौक से
तुमको मेलों की सैर कराया करते थे
हाँ,उन थके कांधों
को भी इंतज़ार है..

वो लाड़
जो बेहिसाब बेमतलब ही
तुम पर लुट जाया करता था
हाँ,उस तनिक भी कम ना हुए लाड़
को भी इंतज़ार है..

वो डांट
जो हर गलती पर
तुमको सही-गलत का पाठ पढ़ाया करती थी
हाँ,उस ख़ामोश पड़ी डांट
को भी इंतज़ार है..

वो दिल
जो जानता है,तुम अब ना लौटोगे
फिर भी अनजान बन जाया करता है
हाँ,उस टूटे दिल
को भी इंतज़ार है..

वो वादा
जो कर गए थे
तुम लौट कर आने का
वापस संग घर ले जाने का
हाँ,अधूरे ही सही पर उस वादे
को आज भी इंतज़ार है
बेटा तुम्हारे लौट आने का...!

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